20 वें तीर्थंकर श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा – Shri Munisuvrat Chalisa

Munisuvrat Chalisa : पिता सुमित्रा एवं माता शामा की आँखों के तारे बीसवें तीर्थंकर श्री मुनिसुव्रत भगवन की भक्ति शनि ग्रह से प्रभावित व्यक्ति के लिए परम शान्ति प्रदायक है। इसीलिए हम आज चालीसा के माध्यम से उनके गुणों का स्तवन  करेंगे।

 Shri Munisuvrat Chalisa

अरिहंत सिद्ध आचार्य को निसदिन करुं प्रणाम |

उपाध्याय सर्वसाधू जी करें स्वपर कल्याण ||

प्रभु मुनिसुव्रतनाथ का मंदिर पावन धाम |

श्याम वर्ण अद्भूत प्रतिमा को कोटि-कोटि प्रणाम ||

( दोहा ) 

जय मुनिसुव्रत दया के सागर, नाम प्रभु का लोक उजागर ||

राजा सुमित्रा के तुम नन्दा, मां शामा की आंखो के चन्दा ||

 

श्यामवर्ण प्रभू मूरत प्यारी, स्तुति करें निशदिन नर नारी ||

मुनिसुव्रत हो अन्तरयामी, लोका लोक जगत हितकारी ||

 

जो तुम भक्ति निशदिन करता, पाप ताप भय संकट-हरता ||

संकटमोचन नाम तुम्हारा, दीन दुखी तुम ही का सहारा ||

 

कोई दरिद्री या तन का रोगी, प्रभू दर्शन से होते निरोगी ||

मिथ्या तिमिर भयो अति भारी, भव की बाधा हरो हमारी ||

 

यह संसार महा दुख दाई, सुख दुख की गहरी हैं खाई ||

मोह जाल में फंसा है बंदा, काटो प्रभु भव भव का फंदा ||

 

रोग शोक भय व्याधि मिटावो, भव सागर से पार लगावो ||

अशुभ कर्म से अब तक भटका, मोह माया बन्धन में अटका ||

 

योग-वियोग और भव का नाता, राग द्वेष जग में भटकाता ||

हित मित प्रिय प्रभू तुमरी वाणी, जग कल्याण करो मुनि ध्यानी ||

 

भव सागर में नाव हमारी, पार करो प्रभु विरद हमारी ||

अब विवेक मेरा हैं जागा, दर्शन करत कर्ममल भागा ||

 

नाम आपका जपे जो कोई, तीन लोक की सम्पदा पाई ||

कृपा दृष्टी जब आपकी होवे, धन आरोग्य समृधि पावे ||

 

प्रभु चरणन में जो कोई आवे, मनवांच्छित फल तुमसे पावे ||

चमत्कार प्रभु आपका न्यारा, संकट मोचन नाम तुम्हारा ||

 

तुम सर्वज्ञ चतुष्टय धारी, मन वच तन वंदना हमारी ||

गिरी सम्मेद से मोक्ष सिधारे, आया अब मैं शरण तिहांरे ||

 

महाराष्ट्र का पैठण तीर्थ, अतिशय क्षेत्र की अद्भूत कीरत ||

मन्दिर की रचना है न्यारी, वीतराग प्रतिमा सुखकारी ||

 

श्याम वर्ण मूर्ति है निराली, मुनिसुव्रत की छवि है प्यारी ||

मानस्तंभ की शोभा न्यारी, देखत मान कषाय निवारी ||

 

मुनिसुव्रत शनिग्रह अधिष्ठाता, दुख संकट हरे दे सुख साता ||

शनि अमावस की महिमा भारी, दर्शन को आते नर नारी ||

 

मुनिसुव्रत दर्शन हितकारी, मन वच तन वंदना हमारी ||

मुनिसुव्रत दर्शन हितकारी, मन वच तन वंदना हमारी ||

( सोरठा छंद )

प्रभु मुनिसुव्रत का चालीसा, नित प्रीत पढ़े जो कोय |

पावे भौतिक सम्पदा, सुख दुःख बन्ध न होय  ||

|| इति श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा – Shri Munisuvrat Chalisa  ||

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